लखीसराय। बिहार के बहुचर्चित NEET-UG री-एग्जाम फर्जीवाड़ा मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो शुक्रवार को लखीसराय पहुंचे और जिला अतिथि गृह में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसके बाद वे सीधे तेतरहाट थाना पहुंचे, जहां इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अब तक इस मामले में 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें 9 डमी (प्रॉक्सी) अभ्यर्थी, 18 बायोमैट्रिक कर्मी और 2 सहयोगी शामिल हैं। जांच एजेंसियां आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच कर रही हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा से फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, मास्टरमाइंड और अन्य राज्यों या जिलों से जुड़े संभावित कनेक्शन का खुलासा हो सकता है। यही वजह है कि आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की कमान अपने हाथ में लेकर जांच तेज कर दी है। गौरतलब है कि 21 जून को लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के दौरान डमी अभ्यर्थियों के परीक्षा देने और बायोमैट्रिक सत्यापन में अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। इसके बाद स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में कई गिरफ्तारियां हुईं और जांच का दायरा बढ़ता गया। डीआईजी के लखीसराय पहुंचने के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों से नए नाम सामने आते हैं, तो जांच एजेंसियां आगे और गिरफ्तारियां भी कर सकती हैं। फिलहाल पूरे बिहार की नजर इस हाई-प्रोफाइल जांच पर टिकी हुई है।
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