लखीसराय/धनबाद। झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन दौरा पहाड़" के तहत सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सागर, भास्कर और सुर्निमल को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगल से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ 15 लाख के इनामी मेहनत उर्फ मोछु उर्फ विभीषण (RCM), गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ (ACM) तथा दो अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा गया। यह कार्रवाई झारखंड पुलिस, धनबाद व गिरिडीह जिला पुलिस, 209 कोबरा बटालियन तथा अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त अभियान के तहत की गई।

लखीसराय कोर्ट हमले से जुड़ा है मिसिर बेसरा का नाम
मिसिर बेसरा का नाम बिहार के सबसे चर्चित नक्सली हमलों में शामिल 2009 के लखीसराय कोर्ट परिसर हमले से जुड़ा रहा है। इससे पहले उसे सितंबर 2007 में झारखंड के खूंटी जिले से गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2009 में लखीसराय कोर्ट में पेशी के दौरान नक्सलियों ने सुनियोजित हमला कर पुलिस पर फायरिंग की और मिसिर बेसरा को छुड़ा ले गए। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी और बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। उसी घटना के बाद वह लगातार फरार चल रहा था।

ऑपरेशन "दौरा पहाड़" कैसे हुआ सफल
झारखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार, उग्रवाद के खिलाफ लगातार चल रहे अभियानों के बीच पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ धनबाद क्षेत्र में मौजूद है। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर कार्रवाई की और बिना किसी बड़े नुकसान के सभी को गिरफ्तार कर लिया।

इसके अलावा दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया।
बरामद हुए हथियार
संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार नक्सलियों के पास से बरामद किए गए— AK-47 रायफल – 3 मैगजीन – 8 जिंदा कारतूस – 288
करीब चार दशक से सक्रिय था मिसिर बेसरा
पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा लगभग 40 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा था। वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया था और झारखंड, बिहार, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता रहा।
175 से अधिक गंभीर मामलों में था आरोपी
मिसिर बेसरा पर हत्या, पुलिस बलों पर हमले, हथियार लूट, विस्फोट, आईईडी हमले और नक्सली हिंसा से जुड़े 175 मामले दर्ज हैं। दस्तावेज़ों के अनुसार वह कई बड़े हमलों का आरोपी रहा है, जिनमें सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला, हथियार लूट और पुलिसकर्मियों की हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं।
पहले भी नक्सल संगठन को लगे बड़े झटके

पुलिस का दावा
झारखंड पुलिस का कहना है कि माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी से राज्य में भाकपा (माओवादी) का नेटवर्क लगभग समाप्ति की ओर है। पुलिस ने शेष उग्रवादियों से हिंसा छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है।







