लखीसराय। अशोकधाम भगदड़ हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। 17 अगस्त को सावन की तीसरी सोमवारी के दिन लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर के पास हुई भगदड़ में घायल पटना जिले के बाढ़-बकमा की रहने वाली सविता देवी की देर रात पटना पीएमसीएच के आईसीयू में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाली महिलाओं की संख्या आठ हो गई है।
17 अगस्त की सुबह अशोकधाम में कैसे हुआ हादसा?
सावन की तीसरी सोमवारी 17 अगस्त की सुबह अशोकधाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। प्रशासन के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच दो ट्रेनें अशोकधाम हॉल्ट पर पहुंचीं, जिसके बाद अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। भीड़ के दबाव के बीच बैरिकेडिंग टूटने और अफवाह फैलने से स्थिति बेकाबू हो गई। प्रशासन की ओर से बाद में स्पष्ट किया गया कि बिजली का पोल गिरने के बाद इलाके में करंट फैलने की अफवाह से श्रद्धालुओं में दहशत फैली और लोग बचने के लिए भागने लगे। इसी दौरान महिलाएं भीड़ के दबाव में गिरती चली गईं और भगदड़ की स्थिति बन गई। हादसे में कई श्रद्धालु घायल हुए और शुरुआत में सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई थी।
जानिए कब क्या हुआ
हादसे के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल सहित अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर स्थिति वाले कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया। शुरुआत में मृतकों की संख्या सात बताई गई थी। बाद में घायल सविता देवी, पति सुधीर सिंह, निवासी बकमा, पटना की हालत गंभीर होने पर उन्हें पीएमसीएच के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई।
अशोकधाम भगदड़ में मृतकों की पूरी सूची
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाली सभी आठ महिलाएं हैं। सात मृतकों की पहचान हादसे के बाद जारी सूची में हुई थी, जबकि आठवीं मृतका के रूप में पीएमसीएच में इलाज के दौरान मृत सविता देवी का नाम सामने आया है।


एक परिवार की तीन महिलाओं की भी हुई थी मौत
अशोकधाम भगदड़ की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में से एक लखीसराय के प्रतापपुर गांव की है। यहां एक ही परिवार की तीन महिलाओं - हेमलता देवी, ललिता देवी और सविता कुमारी की मौत हुई थी। तीनों सावन की सोमवारी पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने अशोकधाम पहुंची थीं।
प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
हादसे के बाद प्रशासन ने घटना के कारणों और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार घटना के दौरान बिजली आपूर्ति बंद थी और जमीन पर गिरे तार को लेकर फैली अफवाह ने स्थिति को और भयावह बना दिया था। हादसे के बाद अशोकधाम में भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। हादसे के बाद प्रशासन ने घायलों के समुचित इलाज और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक निर्देश दिए हैं।
24 घंटे में देनी थी अशोकधाम हादसे की जांच रिपोर्ट, 96 घंटे बाद भी इंतजार; कार्रवाई भी नहीं
हादसे के बाद लखीसराय पहुंचे मुंगेर के कमिश्नर प्रेम सिंह मीणा ने डीएम को एडीएम नीरज कुमार की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। लेकिन हादसे को 96 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इतना ही नहीं, इतने बड़े हादसे के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच टीम की रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आखिर 24 घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश 96 घंटे बाद भी पूरा क्यों नहीं हुआ? और अगर जांच में जिम्मेदारी तय हुई है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?






