पीरीबाजार। विकास और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावों के बीच लखीसराय के पीरीबाजार क्षेत्र के घोघी-कोडाशी गांव की एक तस्वीर ग्रामीणों की बदहाल स्थिति की कहानी बयां कर रही है। बाधित रास्ते के कारण बीमार मरीज को चारपाई पर उठाकर बाउंड्री की दीवार के ऊपर से पार कराना पड़ा। मरीज को वाहन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को पहले दीवार पार कराने की जद्दोजहद करनी पड़ी। तस्वीर में कई ग्रामीण मिलकर चारपाई को संभालते नजर आ रहे हैं। एक तरफ मरीज चारपाई पर लेटा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण उसे सुरक्षित तरीके से दीवार के पार ले जाने में जुटे हैं। यह दृश्य सिर्फ एक मरीज की परेशानी नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की मजबूरी को सामने लाता है, जिन्हें आज भी सामान्य आवागमन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

बीमार मरीज को चारपाई पर लादकर बाउंड्री पार करवाते लोग
बीमार मरीज को चारपाई पर लादकर बाउंड्री पार करवाते लोग फोटो: लखीसराय लाइव
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कजरा सोलर पावर प्लांट के पास बाधित है रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार कजरा सोलर पावर प्लांट के समीप घोघी-कोडाशी जाने वाली सड़क पर रास्ता बाधित होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी है कि जरूरत पड़ने पर वाहन के गांव तक पहुंचने में भी परेशानी होती है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है और उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। सामान्य रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को पहले चारपाई पर उठाकर बाधा पार करानी पड़ती है और उसके बाद वाहन तक पहुंचाया जाता है।

रास्ता बंद होने के कारण खेत से होकर अस्पताल जाते मरीज
रास्ता बंद होने के कारण खेत से होकर अस्पताल जाते मरीज फोटो: लखीसराय लाइव

मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए दीवार बनी मजबूरी

सोचिए, जिस समय किसी मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत हो, उस समय अस्पताल जाने के बजाय परिजनों और ग्रामीणों को पहले दीवार पार कराने का इंतजाम करना पड़े। यही तस्वीर घोंघी-कोडाशी के ग्रामीणों की मुश्किल को बयां कर रही है। मरीज को चारपाई पर उठाकर ले जा रहे ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि रास्ते में कहीं मरीज की हालत और न बिगड़ जाए। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और बीमार लोगों के लिए यह बाधित रास्ता बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है।

प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की समस्या से संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। लोगों का सवाल है कि जब किसी गांव में सामान्य आवागमन तक मुश्किल हो और आपात स्थिति में मरीज को दीवार के ऊपर से निकालना पड़े, तो आखिर ग्रामीणों की समस्या पर गंभीरता कब दिखाई जाएगी? ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थल का निरीक्षण कर बाधित रास्ते को सुचारु कराने और स्थायी आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इसी तरह मरीज को दीवार पार कराते समय कोई हादसा हो जाए या रास्ते की बाधा के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? घोंघी-कोडाशी की यह तस्वीर विकास की चमक से दूर उस ग्रामीण हकीकत को सामने लाती है, जहां एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले बाउंड्री लांघनी पड़ती है। अब देखना होगा कि इस तस्वीर के सामने आने के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या का समाधान करता है या फिर यह मजबूरी यूं ही जारी रहती है।