लखीसराय। पंचायत सचिवों के तबादले को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बिहार सरकार और पंचायती राज विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाकपा जिला परिषद, लखीसराय ने पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले में अनुसूचित जाति के कर्मियों के साथ कथित भेदभाव किए जाने का आरोप लगाते हुए मामले में पारदर्शिता बरतने और लंबित तबादलों पर अविलंब निर्णय लेने की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जितेंद्र कुमार, जिला सचिव हर्षित यादव तथा जिला कार्यकारिणी सदस्य सह वरीय अधिवक्ता रजनीश कुमार ने मंगलवार को संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राज्य में कुल 2,005 पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले का मामला पंचायती राज विभाग के समक्ष लंबित था। विभाग की ओर से 7 अगस्त 2026 को 1,402 पंचायत सचिवों का तबादला किया गया, जबकि 603 पंचायत सचिवों का तबादला लंबित रह गया।

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603 पंचायत सचिवों के तबादले पर उठे सवाल

भाकपा नेताओं का दावा है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तबादले से वंचित रखे गए 603 पंचायत सचिवों में बड़ी संख्या अनुसूचित जाति के कर्मियों की है। पार्टी ने कहा कि यदि यह तथ्य सही है, तो यह गंभीर मामला है और इससे सरकार की तबादला नीति की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। भाकपा नेताओं ने कहा कि सरकारी सेवा में तबादले की प्रक्रिया समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। किसी कर्मचारी के साथ उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

सरकार से पारदर्शी मानदंड सार्वजनिक करने की मांग

पार्टी ने बिहार सरकार और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि 603 लंबित पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले के संबंध में अपनाए गए मानदंड और आधार को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही पात्र अनुसूचित जाति के पंचायत सचिवों समेत सभी लंबित कर्मियों के तबादले पर जल्द निर्णय लेने की मांग की गई है। भाकपा नेताओं ने कहा कि तबादले की प्रक्रिया में पारदर्शिता से ही कर्मचारियों के बीच भरोसा कायम रह सकता है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर पात्र कर्मियों के साथ न्याय करने की अपील की।

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कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

भाकपा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी अनुसूचित जाति के कर्मियों के अधिकार और न्यायपूर्ण तबादला नीति की मांग को लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होगी। हालांकि, अनुसूचित जाति के कर्मियों के साथ भेदभाव के आरोप भाकपा की ओर से लगाए गए हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति से नहीं होती है।