देवघर/सुल्तानगंज। श्रावण माह के आगमन के साथ ही पूर्वी भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवड़ यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हो गई है। "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा कांवड़ मार्ग भक्तिमय हो उठा है। इसी बीच, झारखंड सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा और बेहतर भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर और बाबा बासुकीनाथ मंदिर, दुमका में श्रावणी मेले के दौरान VIP तथा आउट-ऑफ-टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी है। यह निर्णय झारखंड सरकार की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से लिया गया है। पत्र भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सर्वोच्च न्यायालय और सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजा गया है। इसमें स्पष्ट अनुरोध किया गया है कि श्रावणी मेले के दौरान VIP दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की अनुशंसा राज्य सरकार या जिला प्रशासन को न भेजी जाए।

झारखंड सरकार द्वारा जारी पत्र
झारखंड सरकार द्वारा जारी पत्र फोटो: लखीसराय लाइव
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बाबा बैद्यनाथ धाम की अद्भुत महिमा

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं वैद्य के रूप में विराजमान हैं, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को "बैद्यनाथ" कहा जाता है। हर वर्ष श्रावण मास में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ मंदिर, दुमका जाकर भी पूजा-अर्चना करते हैं।

सुल्तानगंज से शुरू होती है 105 किलोमीटर की आस्था यात्रा

श्रावणी कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत बिहार के सुल्तानगंज से होती है, जहां गंगा उत्तरवाहिनी होकर बहती है। श्रद्धालु अजगैवीनाथ घाट से पवित्र गंगा जल भरते हैं और लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस जल से बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

लाखों श्रद्धालु, विशाल भीड़ और प्रशासन की चुनौती

श्रावण माह के दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। सोमवार और विशेष तिथियों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इसी भीड़ को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करने और सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर देने के लिए झारखंड सरकार ने VIP दर्शन की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है।

सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम

श्रावणी मेले को लेकर बिहार और झारखंड सरकारों ने संयुक्त रूप से व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, पेयजल, विश्राम स्थल, कंट्रोल रूम और ट्रैफिक प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।

सरकार का स्पष्ट संदेश

झारखंड सरकार का कहना है कि श्रावणी मेले में हर श्रद्धालु समान है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को विशेष या VIP दर्शन की सुविधा नहीं दी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिना भेदभाव के व्यवस्थित और सुगम दर्शन कराना तथा भीड़ प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाना है। श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों शिवभक्तों की आस्था, तप, अनुशासन और समर्पण का महापर्व है। सुल्तानगंज से देवघर तक की 105 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा और बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक की परंपरा भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का अद्भुत उदाहरण है। इस वर्ष VIP दर्शन पर रोक का निर्णय यह संदेश देता है कि बाबा के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं।