लखीसराय। बड़हिया रेफरल अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था आखिरकार जिला प्रशासन की सख्त निगरानी में आ गई। 17 और 18 जुलाई की रात डीएम सह अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति शैलेंद्र कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही, प्रशासनिक शिथिलता और ड्यूटी व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। तीन पृष्ठों की निरीक्षण रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार नया अस्पताल भवन बंद मिला, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अनुपस्थित पाए गए, नियमित चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं थे, जबकि बिना रोस्टर के आयुष चिकित्सक अस्पताल में कार्यरत मिले। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने कई कड़े निर्देश जारी करते हुए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बंद मिला करोड़ों की लागत से बना नया अस्पताल भवन

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि बड़हिया रेफरल अस्पताल का नया भवन पूरी तरह बंद था। जबकि पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिया जा चुका था कि अस्पताल की सभी इकाइयों को नए भवन में स्थानांतरित कर 24×7 संचालन सुनिश्चित किया जाए। पूछताछ में अस्पताल कर्मियों ने बताया कि इमरजेंसी और IPD अभी भी पुराने भवन से संचालित किए जा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की लगातार अनदेखी की गई है। उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि 18 जुलाई तक हर हाल में अस्पताल की सभी सेवाएं नए भवन में स्थानांतरित कर दी जाएं।

मुख्यालय छोड़कर गायब मिले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अस्पताल में मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट में उल्लेख है कि विभागीय नियमों के अनुसार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अपने मुख्यालय में रहकर अस्पताल का संचालन करना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश मुख्यालय छोड़ना हो तो पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। निरीक्षण में पाया गया कि इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा था। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया।

रोस्टर में नाम नहीं, फिर भी अस्पताल में ड्यूटी करते मिले आयुष चिकित्सक

निरीक्षण के दौरान अस्पताल में मौजूद आयुष चिकित्सक (RBSK) डॉ. आशुतोष प्रताप से डीएम ने उनकी ड्यूटी के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि उनकी ड्यूटी अस्पताल में लगी है। लेकिन जब रोस्टर का मिलान किया गया तो पाया गया कि 17 जुलाई की रात उनके नाम से कोई ड्यूटी निर्धारित ही नहीं थी। पूछने पर वे कोई वैध आदेश या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।रिपोर्ट में डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि बिना रोस्टर ड्यूटी के आयुष चिकित्सक अस्पताल में किस आदेश के तहत कार्य कर रहे थे। साथ ही उनसे यह भी जवाब मांगा जाए कि गलत रोस्टर का हवाला देकर जांच टीम को भ्रमित करने का प्रयास क्यों किया गया।

रोस्टर में जिनकी ड्यूटी थी, वे अस्पताल से थे नदारद

निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में तैयार रोस्टर और वास्तविक उपस्थिति में भारी अंतर पाया गया। 17 जुलाई की दूसरी पाली में डॉ. वंदना कुमारी एवं डॉ. मनीष कुमार साहू की ड्यूटी निर्धारित थी, जबकि रात्रि पाली में डॉ. पल्लवी भारती की ड्यूटी थी। लेकिन निरीक्षण के समय तीनों चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए और भी गंभीर बात यह रही कि डॉ. मनीष कुमार साहू लगभग एक सप्ताह पूर्व ही सीनियर रेजीडेंसी के लिए विरमित हो चुके थे, इसके बावजूद उनका नाम रोस्टर में बना रहा। इससे रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए। डीएम ने तीनों चिकित्सकों से कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा अंतिम निर्णय तक उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया है।

18 जुलाई को फिर पहुंचे DM, तब खुला अस्पताल लेकिन व्यवस्था नहीं बदली

पहले दिन की कार्रवाई के बाद 18 जुलाई की रात डीएम दोबारा अस्पताल पहुंचे। इस बार नया भवन चालू मिला और मरीजों का इलाज भी हो रहा था। लेकिन निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी फिर अनुपस्थित पाए गए। नियमित MBBS चिकित्सक भी अस्पताल में मौजूद नहीं थे। अस्पताल में केवल RBSK चिकित्सक और इमरजेंसी सेवा संचालित होती मिली। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में कुल पांच चिकित्सकों की तैनाती के बावजूद रात की ड्यूटी की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और अधिकांश चिकित्सक शाम होते ही बड़हिया छोड़ देते हैं।

DM ने पूछा- आखिर किसके भरोसे चल रहा है अस्पताल?

निरीक्षण के दौरान यह सवाल भी उठा कि जब नियमित चिकित्सक मौजूद नहीं हैं, प्रभारी अनुपस्थित हैं और नया भवन बंद पड़ा है, तब अस्पताल की व्यवस्था आखिर किसके भरोसे चल रही है। रिपोर्ट में इसे स्वास्थ्य प्रशासन की गंभीर विफलता मानते हुए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई गई है।

प्रभारी को हटाने तक का निर्देश

निरीक्षण रिपोर्ट में सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया है कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए और यह बताया जाए कि उन्हें प्रभारी पद से क्यों नहीं हटाया जाए। इसके साथ ही अस्पताल में आग एवं सुरक्षा व्यवस्था तत्काल प्रभाव से चालू कराने, दवा आपूर्ति केंद्र को 21 जुलाई तक प्रारंभ करने तथा सभी अनुपस्थित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण लेने का आदेश दिया गया है।

रोज रात 8 बजे देनी होगी रिपोर्ट

डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक प्रतिदिन रात आठ बजे स्वयं बड़हिया रेफरल अस्पताल जाकर वहां की स्थिति की जानकारी मोबाइल अथवा दूरभाष के माध्यम से उपलब्ध कराएं। साथ ही अगले तीन दिनों तक अस्पताल की रात्रिकालीन इमरजेंसी सेवा का व्यक्तिगत निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।

CCTV और बायोमेट्रिक से होगी निगरानी

निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी निर्देश दिया गया है कि अस्पताल के नए भवन में अन्य सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर CCTV कैमरे एवं बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली तत्काल स्थापित की जाए। भविष्य में चिकित्सकों और कर्मियों का वेतन बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर सुनिश्चित करने की भी अनुशंसा की गई है। साथ ही स्वीकृत रोस्टर को अस्पताल परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संदेश

बड़हिया रेफरल अस्पताल की यह निरीक्षण रिपोर्ट केवल एक अस्पताल की अव्यवस्था का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत है कि जिला प्रशासन अब सरकारी अस्पतालों में अनुपस्थिति, फर्जी रोस्टर, आदेशों की अवहेलना और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति पर सख्ती से कार्रवाई करेगा। यदि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ती है तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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