लखीसराय। श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक के बाद लखीसराय में नया विवाद खड़ा हो गया है। 30 जून को अशोक धाम में जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की ओर से आयोजित समीक्षा बैठक में नगर परिषद के सभापति अरविंद पासवान को आमंत्रित नहीं किए जाने से नाराज वार्ड पार्षद अब खुलकर विरोध पर उतर आए हैं।

नगर परिषद सभागार में आयोजित सभी वार्ड पार्षदों की बैठक में इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए और इसे नगर परिषद की उपेक्षा बताया गया। बैठक में मौजूद पार्षदों ने कहा कि अशोक धाम स्थित इंद्रेश्वर नाथ मंदिर नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हर वर्ष श्रावणी मेला के दौरान नगर परिषद की ओर से श्रद्धालुओं के लिए साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं, कचरा प्रबंधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसके बावजूद मेला की तैयारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों में नगर परिषद और उसके जनप्रतिनिधियों को महत्व नहीं दिया जा रहा है। वार्ड पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि यदि नगर परिषद को केवल काम करने के समय याद किया जाएगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा तो यह स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि भविष्य में श्रावणी मेला से जुड़ी सभी बैठकों में नगर परिषद के सभापति और जनप्रतिनिधियों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान पार्षदों ने चेतावनी भी दी कि यदि जिला प्रशासन का यही रवैया जारी रहा तो नगर परिषद श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं को दी जाने वाली निःशुल्क सुविधाओं पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होगी। इस चेतावनी के बाद मामला प्रशासन और नगर परिषद के बीच टकराव का रूप ले सकता है। वार्ड पार्षद गौतम कुमार ने कहा कि नगर परिषद को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है, जबकि मेला की अधिकांश बुनियादी व्यवस्थाओं का दायित्व नगर परिषद ही निभाती है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की भागीदारी के बिना मेला की समुचित व्यवस्था की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रशासन को सभी जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते हुए उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए।

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वार्ड पार्षद सुनील कुमार ने कहा कि अशोक धाम नगर परिषद क्षेत्र में स्थित है और मेला के दौरान नगर परिषद पूरी जिम्मेदारी के साथ सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद सभापति को बैठक में नहीं बुलाना जनप्रतिनिधियों का अपमान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भविष्य में भी नगर परिषद की उपेक्षा की गई तो मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध कराने पर गंभीर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच समन्वय नहीं बना तो श्रावणी मेला की तैयारियों के बीच यह विवाद और गहरा सकता है।





